Monday, 23 May 2011

सपने देखना तो मेरी आदत है ,और सपने टूटना मेरी किस्मत है.ही 
हर बार इन टूटे हुए सपनो के कुछ टुकड़े तो हाथ लग ही गए लेकिन इस बार
तो सपनो के टूटने  की आवाज़ भी कानो तक नहीं पहुँच रही है.
हाय रे ये किस्मत ...............