तेरी वाणी ,मेरी अभिव्यक्ति
तू पथप्रदर्शक ,मै पथिक
स्वर्णिम मुख ,तेरा प्रत्बिम्ब
तेरे फैसले, मेरा आगाज ।
कारण के खोज में हू मै आज भी तेरे अस्तित्व के ,
ये असर था "दिल की सुनो "का
या तेरी आवाज़ ही ऊँची थी ।
विचलित मन, तेरी दिलासा
सुनी रातें ,तेरी बातें
कठिन संघर्ष ,विजय तेरी ।
क्यों चिंतन हारा तुझसे ,
क्यों गिरा मै गर्त में खुद से ,
क्यों पिलाया गरल प्रेम का ?
मेरा मस्तिष्क ,तेरा चिंतन
मेरा हृदय ,तेरा कुञ्चन
सांसे 'तेरी' ,बस जीवन मेरा |
मेरा मस्तिष्क ,तेरा चिंतन
मेरा हृदय ,तेरा कुञ्चन
सांसे 'तेरी' ,बस जीवन मेरा |