उठ ना पाया जमीं से ,
सोचा था कदमों में नाप दूंगा दुनिया सारी,
चल ना पाया कदम भर ,
सोचा था कर दूंगा सर्वस्व प्रकाश ,
हो गया जीवन अंधकारमय अपना
सोचा था लिखूंगा सफलता के गीत इन हाथों से ,
असफलता के इस संगीत को कोई रोक ना पाया
जीवन की इन प्रतिकूलताओं से होगा `विशिष्ट` भी अनभिज्ञ
मैंने सोचा ना था ..................................