Tuesday, 21 January 2014

गुफ्तगु आँखों से

मैंने  झुरमुटों  की आड़  से  देखा है
तूने  कलियों  को  तोडा  है
तूने  सपनो  को  मरोड़ा  है ,
है  साफ  झलकता  तेरी  आँखों  से।

आँखे  तेरी  मदिरालय  हैं ,
मैंने  भी   मदिरापान  किया।
है  तन्द्रा  तेरी  आँखों  में ,
क्या  तूने  भी  मदिरापान  किया।

अनुभवहीन  तेरी  इन आँखों  ने ,
कटु  अनुभव कितने दिए मुझे।
आँखों  से  मेरे  अश्रु  बहे ,
ये  हश्र  था तेरी इन आँखों का।

आँखों  से  तेरी ये गुफ्तगु ,
एक  कश्मकश  पैदा  करती है।
आँखों की  तेरी ये सियासत ,
अब  समझ  से  मेरी परे   है।

आँखों  से तेरी  झलकता  है ,
ना  छोडू  ऊम्मीद  का दामन  अभी ,
तेरी  झुकी  हुई  जो  नजरें  हैं ,
कुछ खास  इशारा  करती हैं। 

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